बदलते मौसम में दुधवा में हो रहे बाघों के दीदार

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स्क्रिप्ट- मोहम्मद असलम

प्लेस- लखीमपुर खीरी।

इंडोनेपाल सीमा पर बसे लखीमपुर खीरी का एक मात्र दुधवा टाइगर रिज़र्व वैसे तो बेशकीमती वन सम्पदाओं और दुर्लभ वन्यजीवों से लबरेज़ है लेकिन दुधवा भ्रमण के दौरान पर्यटको की निगाहें बाघ के दीदार को तलाशती रहती हैं या यूँ कहें के सबसे ज़्यादा उत्सुक्ता पर्यटकों में बाघ को देखने की ही होती है। और जब ऐसा ना हो पाये तो पर्यटकों को लगता है कि जैसे उनकी दुधवा यात्रा अधूरी सी रह गई।लेकिन अगर बात वन्यजीव प्रेमियों की की जाये तो उनके अनुसार बदलते मौसम के बाद दुधवा में बाघों के दीदार आसान हो रहे हैं। पर्यटकों को लगातार यहाँ धुप में अठखेलियां करते व स्वछन्द विचरण करते बाघ दिखाई दे रहें हैं। जिससे पर्यटकों में काफी रोमांच और खुशी दिखाई दे रही है और यही नहीं पर्यटकों के लिये एक खुशी का कारण यह भी देखा जा रहा है कि जहां हाथियों की सफारी पार्क प्रशासन ने बंद कर दी थी जिससे कि एक सींघ वाले गैंडे का दीदार होना पूरी तरह से बंद हो गये थे लेकिन एक बार फिर पार्क प्रशासन ने एक सींघ वाले गैंडे का दीदार करवाने के लिये हाथियों की सफारी दोबारा शुरू कर दी है जिससे पर्यटकों में खुशी दोगुनी हो गयी है और लगातार वन्यजीवों के इज़ाफा को लेकर पार्क प्रशासन भी काफी संजीदा लग रहा है और इसी कारण एक स्वस्थ तेदूएं को इटावा सफारी से लाकर दुधवा टाइगर रिजर्व रेंज अधिकारियों की देखरेख में उत्तर सुनारीपुर के सफारी रेंज की रेहटा बीट में रेहटा मचान के पास जंगल में छोड़ा गया।जिससे की तेंदवे की तादादों में भी इज़ाफा हो सके ।

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