मायावती और अखलेश का महा गठबंधन पर हुआ “तीन तलाक”

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बीएसपी प्रमुख मायावती ने सियासत में शतरंज की चाल चल सपा के विश्वास को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आम जनमानस को सपा बसपा के गठबंधन को लेकर पहले से ही अंदेशा था कि ये कपड़ों की तरह बदलने बाले रिश्ते होंगे, उसी के परिणाम में सपा पार्टी को लोकसभा चुनाव में करारी हार का मूंह देखना पड़ा । इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के इस महागठबंधन को तो भारत के प्रधानमंत्री ने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी, उसके बाद जनता ने लोकसभा चुनाव में उसका जबाव दे दिया।

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1-बसपा सुप्रीमो मायावती ने कुछ घंटों पहले एक टिवट् किया और उसमें सपा के लिए लिखा – ’’परन्तु लोकसभा आमचुनाव के बाद सपा का व्यवहार बीएसपी को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा करके बीजेपी को आगे हरा पाना संभव होगा । जो संभव नहीं है। अतः पार्टी व मूवमेंट के हित में अब बीएसपी आगे होने वाले सभी छोट-बड़े चुनाव अपने बूते पर ही लड़ेगी।

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अब बसपा प्रमुख मायावती की बातों से जाहिर हो रहा है कि मायावती भाजपा को हराने के लिए सपा के साथ गठबधन किया था लेकिन भाजपा को दोनों दल मिलकर भी उत्तर प्रदेश में मात नहीं दे पाये यानीकि मोदी के -चैकेदार चोर है के नारे ने सभी गठबंधनों की हवा निकाल दी । लेकिन मायावती अब सावित करने में लगी हैं कि सपा से दोस्ती की थी वो

देश हित में था, जब सियासी संबन्धों को तोड़ा है वो पार्टी हित में किया गया है , यानिकी अब आप सब समझ ही गये होंगे की मायावती कहना चाहती हैं कि-चित भी मेरी और पट भी मेरी।

मायावती ने टिवट् के जरिये बताया कि सपा के साथ लोकसभा में गठबंधन ’भाजपा को हराने के लिए किया लेकिन ऐसा संम्भव नहीं हुआ, और न ही आगे इस गठबंधन से हो पायेगा ।

2. राजनीति में बुआ का दाव अखलेश पर क्यों पड़ा भारी ये तो जगजाहिर जब बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के संम्बधों को दरकिनार कर दिया है लेकिन सपा से गठबंधन के बाद बसपा सुप्रीमो ने अपने टिवट्र लिखा है कि – वैसे भी जगजाहिर है कि सपा के साथ सभी पुराने गिले-शिकवों को भुलाने के साथ-साथ सन् 2012-17 में सपा सरकार के बीएसपी व दलित विरोधी फैसलों, प्रमोशन में आरक्षण विरुद्व कार्यों एवं बिगड़ी कानून व्यवस्था आदि को दरकिनार करके देश व जनहित में सपा के साथ गठबंधन धर्म को पूरी तरह से निभाया।

लेकिन पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने अपने पिता जी की बात पर यकीन कर लिया होता तो “यूएस एड़ थ्रो” वाला हिसाब सपा को न देखने को मिलता,क्योंकि ये सब जानते हैं कि जो मायावती 2014 के लोकसभा चुनाव में सांसद की एक भी शीट नहीं ला पायी वो कैसे 10 शीट 2019 के लोकसभा चुनाव में ले आई, खैर ये छोडियेगा ये तो राजनीति है इसमें उपरे चढ़ने वाला नीचे वाले में लात मार देता है। लेकिन ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा कि राजनीति के इस भंवर में कौन किसको मात देता है।

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